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आज सालता है शिवपिंड पर औरंगजेब का हमला


महेश कारपेंटर -देवास- जिला मुख्यालय से 16 किमी दूर स्थित भौंरासा अपने अंदर कई ऐतिहासिक रहस्य
समेटे हुए है। इसके अलावा जिलें में पुरात्तवीय, पौराणिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व से जुड़े भगवान शंकर के अनेक धर्मस्थल है। आकाश मार्ग से उतारा गया नकलन का सतयुगकालीन मंदिर, चैबाराधीरा में गोपेश्वर महादेव, सोनकच्छ में कालीसिंध के तट पर पीपलेश्वर महादेव, करनावद में कर्णेश्वर  महादेव, बागली  के जटाशंकर सहित और भोले बाबा के अन्य भी मंदिर है, जो रामायण, महाभारत कालीन धार्मिक धरोहरों के रूप में विद्यमान हैं। भौंरासा का भंवरनाथ मंदिर भी शिव के इन्हीं धर्मधामों में स्थापित है। इंदौर-भोपाल रोड स्थित भौंरासा में नगर पंचायत द्वारा महाशिवरात्रि पर्व पर भंवरनाथजी का प्राचीन मेला लगाया गया है। प्राचीन काल से लगते आ रहे भंवरनाथजी के इस मेले में आने वाले दर्शनार्थियों की बातचीत से इस बात का स्पष्ट आभास मिलता है कि भौंरासा एवं आसपास क्षेत्र के शिवभक्तों को यहां शिव पिंड पर औरंगजेब द्वारा किया गया हमला आज भी सालता है। ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि शिवपिंड पर औरंगजेब ने जब गंडासे से प्रहार किया तो शिवलिंग में से रक्त की धारा बह निकली थी। शिवलिंग से रक्तधार बहते देख औरंगजेब को यहां से भागना पड़ा था। मंदिर में मनकानेश्वर की पूजा अर्चना अभिषेक करने आने वाले प्रत्येक दर्शनार्थियों व भक्त की यह जिज्ञासा रहती है कि वह शिवलिंग पर औरंगजेब द्वारा किए गए गंडासे के प्रहार का निशान देखें। निशान देखने के बाद दर्शनार्थियों के मन में स्वभाविक तौर पर अपने आप उस आतातायी के विरूद्ध क्रोध उफनता है। साथ ही जिससे मनकानेश्वर के प्रति और श्रद्धा बढ़ती है।
नगर के राजपुरोहित चंद्रशेखर जोशी, मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर शर्मा, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष संजय जोशी, नगर पंचायत अध्यक्ष सीमा राजेंद्र यादव, उपाध्यक्ष जीवनसिंह ठाकुर, सोनकच्छ भाजपा मंडल अध्यक्ष आरामसिंह ठाकुर, समाजसेवी जमनालाल पहलवान, वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम नागर, परमानंद कारपेंटर, अशोक नागर, प्रमोद पालीवाल सहित अन्य वरिष्ठजन बताते है कि पौराणिक शिवलिंग पर औरंगजेब के गंडासे का निशान पहले काफी गहरा था। समय के साथ-साथ गंडासे के वार से बने निशान का आकार घट रहा है। जिलेभर में धर्मालुजनों में इस सिद्ध स्थल के प्रति असीम श्रद्धाभाव है।


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